मुझे रात के आने से
मुश्किल नहीं है,
मुझे रात के छाने से
मुश्किल नहीं है।
मुश्किल है तो बस
इतनी सी जनाब
रात आती है मेरी तो
ढलती नहीं है,
रात आती है मेरी तो
कटती नहीं है।
-विशाल "बेफिक्र"
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
कैसे हैं हम क्या हाल है मेरा, मत पूछो अब मस्जिद जाता हूँ, कैसे तेरे घर पहुंच जाता हूँ ।
-
1. हुक्मरानों के तब तख्तोताज हिलेंगे... जब चश्मे खुशफहमी के आंखों में न रहेंगे । 2. तक़दीर इस कदर सोई है मेरी... उसको जगाने में, मैं भी सो...
-
तेरी हर ख़्वाहिश को पूरा करने को ये दिल चाहता है तुझसे मुहब्बत की आजमाइश को ये दिल चाहता है मुकम्मल जहाँ तब होगा नसीब ऐ मेरे यार अपना तो...
No comments:
Post a Comment