बेफ़िक्र आवारा
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Friday, August 7, 2020
तेरे घर पहुंच जाता हूँ
कैसे हैं हम क्या हाल है मेरा, मत पूछो अब
मस्जिद जाता हूँ, कैसे तेरे घर पहुंच जाता हूँ ।
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तेरे घर पहुंच जाता हूँ
कैसे हैं हम क्या हाल है मेरा, मत पूछो अब मस्जिद जाता हूँ, कैसे तेरे घर पहुंच जाता हूँ ।
चश्मे खुशफहमी के आंखों में न रहेंगे ।
1. हुक्मरानों के तब तख्तोताज हिलेंगे... जब चश्मे खुशफहमी के आंखों में न रहेंगे । 2. तक़दीर इस कदर सोई है मेरी... उसको जगाने में, मैं भी सो...
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जिंदगी, तुम कमाल हो मौत से बचा, एक सवाल हो ।
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