Thursday, February 18, 2016

वो कहते हैं

वो अफज़ल को गुरु  कहते हैं ,
 हम  शिक्षक को गुरु कैहते हैं 
वो भारत की बर्बादी कहते हैं ,
 हम वन्दे मातरम  कहते हैं 
वो कश्मीर की आज़ादी कहते हैं, 
हम कश्मीर की आबादी कहते हैं 
वो पाकिस्तान ज़िंदाबाद कहते हैं ,
हम हिंदुस्तान ज़िंदाबाद  कहते हैं 
वो भारत  के टुकड़े करते  हैं,
 हम उन टुकड़ो में रहते हैं 
वो आतंकी को शहीद कहते हैं ,
हम हनुमन को शहीद कहते हैं 
वो चैन से सो  सके इसीलिए, 
हम सियाचिन पे बेमौत मरते हैं 
वो सुरक्षित रह सकें इसीलिए ,
हम सीमा पर रहते हैं 
वो पढ़ कर राष्ट्रद्रोह कर सकें ,
इसलिए अनुदान हम  करते हैं 
वो कानून और तंत्र का मखौल  सकें, 
हम इस बात से खौफ में रहते हैं 
अरे सांस तो ले सकता था हनुमन,
गर वो लोग गर्व से हिन्दुतानी कह सकें 



Wednesday, July 1, 2015

तुझे सोच के

सुकून मिलता है
 तुझे देख के ।
जूनून मिलता है
 तुझे सोच के ।

क़यामत आती है 
मुझ पर ।
ऐसे न देख ऐ 
जालिम हसीन ।
रूह को चैन मिलता 
तुझे देख के ।

तेरा जिक्र हो या 
तेरी फिक्र हो ।
तन मन में अजब सी 
बेचैनी होती है ।
जुदा है तू मगर ऐ
 मेरे जाने जिगर ।
डर लगता है तेरी 
जुदाई सोच के ।

-विशाल 'बेफिक्र'



शहर में भूला गांव वाला ।

घूम घूम के थक गया हूँ ।
इस अजब से भंवर में ।
सच ही कहते थे लोग ।
बहुत धक्के हैं इस शहर में ।
हम नहीं थे इतने नादाँ ।
जाएँ तो अब जाये कहाँ ।
छोड़ के आ गया हूँ सब कुछ ।
अब मर मिटेंगे इस शहर में ।
कोई तो हो एक किरण ।
कर सकूं में कुल का पालन ।
मिल जाये इन दो हाथों को काम ।
पढ़ जाये बच्चे और हो प्रभु का नाम ।
बस बेबस हूँ लाचार हूँ में ।
कैसे करूँगा सारे वादों को पूरा में ।
आस लगाये रखता हूँ बस इतनी सी
होगी सुबह कभी मेरी भी ।