बेफ़िक्र आवारा
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Thursday, July 30, 2020
दास्ताँ
वैसे तो कलम से लिखी जाती हैं दास्ताँ, पर ज़िक्र हौंसलों का ही होता है वहाँ !
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आशिक़ी
आशिकी इक धुंआ है 'बेफ़िक्र' साँस लेने नही देती, दम ये घोंट देती है
Night Shift
जब जागेंगे, तब दिन-रात का सोचेंगे, रातों में नींद, आती नही मुझे आजकल... दिन में आई है नींद, तो अब रात हुई है मेरी । #NightShift
तेरे घर पहुंच जाता हूँ
कैसे हैं हम क्या हाल है मेरा, मत पूछो अब मस्जिद जाता हूँ, कैसे तेरे घर पहुंच जाता हूँ ।
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