कल्लू ने मार्किट से नया एंड्राइड मोबाइल फ़ोन अभी खरीद भर था। सालों से कीपैड की बटने दबा दबा कर उसका एक्यूप्रेशर हो रहा था। पर उसको वो आनंद नहीं मिल रहा था। खुश तो था बड़ी मुश्किल से जाने कितनी हजामत और बाल काटने के बाद जो रकम उसने जोड़ी थी आज उसका फल था ये एंड्राइड फोन। उसके घर में आज जश्न का माहौल था। बीवी और चार छोटे बड़े बच्चे खुश थे की आज कल्लू मियां कुछ ऐसा ला रहे हैं जो उनकी किस्मत बदल देगा। कल्लू ने बाजार जाते वक़्त ही इसका संकेत दे दिया था कि आज रात को मुर्गा बना लेना। घर में बीवी की ये ख़ुशी भी शायद शादी के बाद पहली बार आयी थी। कल्लू उस फोन को बड़े एहतियात से घर में ला रहा था। फेसबुक गूगल यूट्यूब न जाने क्या क्या उसके दिमाग में चले जा रहा था। भगवान ग़रीबों के घर खुशियां कुछ ज्यादा ही ज़ोर से लाता है या शायद गरीब थोड़ी सी खुशी में ही अपना सारा जहाँ ढूँढ लेता है। मन में खुशियों की बहार उमड़ पड़ी थी कल्लू के। कल्लू घर का दरवाजा खटखटाता है। वो मुर्गे की खुशबू जो घर के रसोई से आ रही थी , को दरवाजे की दरख़्त से सूंघ पा रहा था। दरवाजा खुलता है। छोटा बेटा पापा क्या लाये कहके लिपट जाता है। इतने में कल्लू के हाथ से वो फोन छिटक जाता है और फोन सीधा ज़मीन से टकराके छिन्न भिन्न हो जाता है। कल्लू को याद आता है कि दूकानदार कुछ टेम्पर्ड ग्लास लगाने की बात कर रहा था, जो वो चाँद रुपये बचाने के लिए मना कर देता है । अब घर में किसी के मरे सा सन्नाटा था। बीवी जब तक उस फोन को ठीक से निहार पाती वो दम तोड़ चूका था। अरमानो की इस कदर अर्थी उठते देख वो टूट के रो पड़ती है। जाके रसोई में मुर्गे को पकाने लग जाती है। इधर कल्लू हक्का बक्का खड़ा होके अपने सपनों को टूटते देखता रहता है। बीवी आती है सभी को मुर्गे को परोस के कोने में जाकर फिर फुट के रो पड़ती है। मुर्गा बहुत स्वाद था पर कोई एक दुसरे को बता नहीं पता है।
भगवान् गरीबों पे कुछ ज्यादा जल्दी खफा भी हो जाता है। ये शायद कल्लू को पता चल गया था।
Sunday, February 19, 2017
कल्लू का एंड्राइड फ़ोन
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